जब पवित्र आत्मा तुम पर आयेगा तब तुम सामर्थ पाओगे और येरूशलेम और यहूदिया और सामरिया और पृथ्वी के छोर तक मेरे गवाह होगे । (प्रेरितों के काम 1:8)
तुम जाकर सब जाति के लोगों को चेला बनाओ और उन्हें पिता, पुत्र और पवित्र आत्मा के नाम से जलदीक्षा दो और जिन बातों की मैंने तुम्हें आज्ञा दी है उन सब का पालन करना सिखाओं।(मत्ती 28:18-20)
प्रभु के राज्य का यह सुसमाचार सारे जगत में प्रचार किया जाएगा, कि सब जातियों पर गवाही हो, तब अन्त आ जाएगा।(मत्ती 24:14)
इस के बाद मैं ने दृष्टि की, और देखो, हर एक जाति, और कुल, और लोग और भाषा में से एक ऐसी बड़ी भीड़, जिसे कोई गिन नहीं सकता था श्वेत वस्त्र पहिने, और अपने हाथों में खजूर की डालियां लिये हुए सिंहासन के साम्हने और मेम्ने के साम्हने खड़ी है और वे पुकार रहे थे कि, “सिंहासन पर विराजमान हमारे परमपिता की जय हो और मेमने की जय हो।”। (प्रकाशित वाक्य 7:9,10)
सन्दर्भ
आज पारिवारिक सतसंग व्यापक रूप से पूरे भारत और अन्य देशो में स्थापित हो रहें है। भारत के गाँव खेड़ो और झुग्गी झोपड़ियों में प्रभु
यीशु पर आस्था रखने वाले अधिकांश लोग विजातियों से ही आ रहें है। इनमे अधिक संख्या में अनपढ़ या ज्यादा पड़े लिखे
नहीं होते लेकिन आस्था में मजबूत और अपने संगी साथियों और परिवार और समाज के लोगों
को प्रभु में लाने में माहिर होते हैं। प्रताड़ित होने पर भी अपनी गवाही देने से पीछे
नहीं हटते।
वे आधुनिक
कलीसिया की भाषा को जैसे चर्च, पास्टर, बिशप, पुल्पिट,
उद्धार, उद्धारकर्ता, विश्वास, परमेश्वर, यहोवा,
बपतिस्मा, राजदूत, भविश्यवक्ता, सब्त, फसह का पर्ब, पवित्र ब्यारी,
मसीह,
मनुष्य का पुत्र, व्यवस्था, अनंत
जीवन,
दुष्टात्मा, पशचाताप
इत्यादि को ठीक से नहीं समझते इसलिए इनके बदले में उनके बोलचाल की सरल भाषा का उपयोग
किया गया है। जैसे परमेश्वर के लिए परमपिता,
बपतिस्मा के लिए जलदीक्षा, कलीसिया
के लिए सतसंग,
उदधार्कर्ता के लिए मुक्तिदाता, विश्वास के लिए आस्था, प्रेरित के लिए राजदूत, भविस्यवकता
के लिए नबी
और पास्टर के लिए पुरोहित इत्यादी।
इसी तरह से पाश्चात्य संस्कृति में लिप्त मसीही
“प्रभु येशु” को “यीशु यीशु” और सृष्टिकर्ता परमपिता को ‘तू
तेरा’ जैसे अपमानजनक शब्दों से सम्बोदित करते हैं
जबकि अपने लिये आदरसूचक ‘आप’ जैसे शब्द का उपयोग करते हैं। आवश्यक है की हम भी विजातियों के सामान विश्व
निर्माता और मुक्तेश्वर को आदरसूचक शब्दों से संबोधित करें।
यदि आप प्रभु के आज्ञानुसार सब जातियों के
लोगों को चेला बनाना चाहते हैं और परमपिता के राज्य का विस्तार पृथ्वी की छोर
तक करना चाहते हैं तो आपको पानी,
पवित्र आत्मा और आग के बावजूद उनकी संस्कृति और भाषा का भी बपतिस्मा लेना जरूरी है।
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